Saturday, October 25, 2008

" और अब क्या आज है "

जब हुए हम तब था क्या , और अब क्या आज है !
थी खुशी घर में सभी को , खो गई जो आज है !

था सवेरा तब ज़िन्दगी में , जो अँधेरा अब आज है !
देखा था जो रास्ता तब , खोया सा अब वो आज है !

सूर्य सा था तेज़ जो तब , अब वो बनके तैय्यार आग है !
देखा था जो सपना तब , अलापता अभी भी वही राग है !

ज़िन्दगी करीब से देखी थी तब , देखता जो वो आज है !
सोंचता था कुछ वो तब , सोंचता वो जो अब आज है !

आज जागी है तमन्ना , कुछ कर गुज़र जाने की मन में उसके !
देखेगा सारा ज़माना पूरी होगी हसरत थी जो दिल में उसके !

रोकने से रुकेगा वो , रोकने की कोशिश करना !
आँधियों को चीरता वो , बनाएगा खोया रास्ता अपना !

अब है दिखती मंजिल वो उसको , देखता था वो जो तब !
खुशी आएगी मेहनत से उसके , जो खुशी थी घर में तब !

थी खुशी जो घर में तब , आज अब आने को वो बेकरार है !
मेहनत से डर आदमी , तू भी खुशी का हकदार है !

जो था अंधेरा ज़िन्दगी में तब , बन के सवेरा वो अब आज है !
रात में बन के सितारा , चमकता आसमान में अब वो आज है !

जब हुए हम तब की खुशी , अब फैलाती रोशनी जीवन में आज है !
माता पिता की सब कुर्बानी , लाई रंग जीवन में उनके आज है !




8 comments:

Unknown said...

very nice poem... i must say u r simply gr8... gud kavi

Unknown said...

kya baat hai
kabse shru kiya hai

Unknown said...

nice poem

HIMANSHU SHEKHAR PATI TRIPATHI said...
This comment has been removed by the author.
Unknown said...

nice poem

RAJESH KUMAR said...

Fantastic poem........you will be agreat poet in future.

Rajesh chauhan

HIMANSHU SHEKHAR PATI TRIPATHI said...
This comment has been removed by the author.
Unknown said...

very realitstic poem..............
i thnk u r a gud poet who believes in simplicity only...........